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पंचायत चुनाव से पहले सरकार को हाईकोर्ट का बड़ा झटका: DC की 5% आरक्षण शक्तियों पर कोर्ट की रोक

➤ हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट का बड़ा झटका, DC की 5% आरक्षण शक्तियों पर रोक
➤ कोर्ट ने 7 अप्रैल शाम 5 बजे तक नया रिजर्वेशन रोस्टर जारी करने के आदेश दिए
➤ खंडपीठ ने प्रावधान को प्रथम दृष्टया संविधान के विपरीत बताया


हिमाचल प्रदेश सरकार को पंचायत चुनाव से पहले हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा उपायुक्तों (DC) को पंचायत चुनावों में 5 प्रतिशत सीटों के आरक्षण रोस्टर में बदलाव की दी गई शक्तियों पर तत्काल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी जिले में इन शक्तियों का उपयोग करते हुए आरक्षण रोस्टर जारी किया गया है, तो वह भी फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा।

यह आदेश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने इस प्रावधान को प्रथम दृष्टया संविधान के अनुच्छेद 243(d) के विपरीत माना और इसे प्रारंभिक तौर पर गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने सभी जिलों के डीसी को निर्देश दिए हैं कि वे 7 अप्रैल शाम 5 बजे तक हर हाल में पंचायत चुनाव के लिए नया आरक्षण रोस्टर जारी करें।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि अधिकांश पंचायती राज संस्थाओं के लिए आरक्षण रोस्टर पहले ही जारी किया जा चुका है। सरकार ने कहा कि चुनाव नियम बनाने की शक्तियों के तहत यह संशोधन किया गया था। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि भौगोलिक आधार पर 5% आरक्षण बदलने की शक्ति संविधान में कहीं भी प्रदत्त नहीं है, इसलिए यह संशोधन असंवैधानिक है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताते हुए सरकार के 30 मार्च के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी।

यह याचिका ठियोग की घोड़ना पंचायत के पूर्व प्रधान विकेश जिंटा और अन्य द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने सरकार द्वारा डीसी को दी गई 5 प्रतिशत रोस्टर बदलने की शक्तियों को चुनौती दी थी। सुबह इस मामले पर चीफ जस्टिस की बेंच में प्रारंभिक सुनवाई हुई, जिसके बाद इसे संबंधित खंडपीठ को भेजा गया। दोपहर बाद विस्तृत सुनवाई के बाद आदेश जारी किए गए।

कोर्ट के फैसले से पहले कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों के डीसी आरक्षण रोस्टर जारी कर चुके थे। अब यदि इन जिलों में 5% विशेष शक्तियों का उपयोग हुआ है, तो संबंधित डीसी को दोबारा रोस्टर जारी करना होगा। इससे पंचायत चुनाव की तैयारियों पर सीधा असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि सुक्खू सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में पंचायती राज कानून में संशोधन कर यह शक्ति डीसी को दी थी। इस फैसले पर पहले विधानसभा में भी जोरदार राजनीतिक विवाद हुआ था और विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप से गरमा गया है।